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चार टीमों ने निरीक्षण में पाया सही फिर भी उखड़ गई टारिंग

लगभग साढ़े चार करोड़ से बनी जोल-खुरवाईं सड़क की टारिंग उखड़ने से लोक निर्माण विभाग और निर्माण एजेंसी सवालों के घेरे में है। हैरत की बात है कि टारिंग के बाद चार टीमों ने इसका निरीक्षण कर इसे पास किया। इसके बावजूद कुछ समय बाद ही टारिंग उखड़नी शुरू हो गई।


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विभाग ने करीब 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण ठेकेदार से करवाया है। इस सड़क पर अंबेहड़ा से कठोह तक सड़क की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहीं ज्यादा टारिंग उखड़ी है। टारिंग उखड़ने से लोक निर्माण विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। 

सवाल उठाने स्वाभाविक है कि यदि सड़क के निर्माण में कोई कोताही नहीं बरती गई। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी सही है तो टारिंग कैसे उखड़ रही है। नाबार्ड के तहत बन रही सड़क की गुणवत्ता का निरीक्षण एक दो नहीं चार बार हो चुका है। 

इसमें नेशनल क्वालिटी मॉनिटर दो बार जबकि दो दफा विभाग की टीमों ने निरीक्षण किया है। हैरत की बात है कि सभी निरीक्षण टीमों की रिपोर्ट में कहीं कोई कमी नहीं मिलती। इसके बावजूद सड़क कुछ समय में ही उखड़ जाती है। विभाग से लेकर ठेकेदार तक की समझ में नहीं आ रहा कि सड़क के टूटने का कारण क्या है।

कहीं यह तो नहीं समस्या



जोल-खुरवाई सड़क पर नालियों और पुलियों को बनाना शायद विभाग भूल गया है। साथ ही सीपेज एरिया में भी कोई विशेष प्रावधान नहीं करना भी बड़ा कारण हो सकता है। विभाग के मुताबिक सड़क के टूटने का कारण ओवरलोडिंग, सीपेज, सब-ग्रेड स्टेट में यानी लो एरिया में पानी की सीपेज बताया जा रहा है। 

सड़क के बार-बार टूटने के बाद सड़क के दो किलोमीटर हिस्से को विभाग ने एक्स्ट्रा स्ट्रेंथनिंग के तहत पीसी की जगह बिटुमन मैकडम और बीसी बिटुमन कारपेट बिछाया है। इसके बावजूद सड़क के टूटने की वजह विभाग को नहीं मिल रही है।

ओवर लोडिंग है वजह


पीडब्ल्यूडी जोल के एसडीओ केके शर्मा का कहना है कि सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। जल्द ही ठेकेदार से सड़क ठीक करवाने का काम शुरू करवा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़क की गुणवत्ता निरीक्षण में सही पाई गई है। लेकिन सड़क के उखड़ने का मुख्य कारण ओवर लोडिंग है। एसडीओ ने कहा कि ओवर लोडिंग की वीडियोग्राफी और विभागीय रिपोर्ट भी तैयार की गई है।

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