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पशुओं में बांझपन के कारणों पर होगा शोध hp news

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत दुर्गम क्षेत्रों के पशुओं के बांझपन के कारणों पर शोध किया जा रहा है। इसके लिए कृषि विवि से संबद्ध वैटरिनरी कालेज के पशु चिकित्सक दुर्गम क्षेत्रों में शिविरों का आयोजन कर रहे हैं। hp news जानकारी के अनुसार पिछले छह वर्षों के दौरान वैटरिनरी कालेज के चिकित्सकों की टीम ने दुर्गम इलाकों में लगभग सौ शिविरों के साथ कुल 261 शिविरों का आयोजन किया है,

जिसमें करीब सात हजार पशुओं की जांच करने के साथ ब्लड व यूटरीन डिस्चार्ज सैंपल लिए गए हैं। इन सैंपलों की जांच से यह जाना जाएगा कि ऊंचे क्षेत्रों में गायों में बांझपन की समस्या के क्या कारण हैं। इस कड़ी में वैटरिनरी कालेज के वैटरिनरी गायनोकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डा. मधुमीत सिंह, डा. प्रवेश कुमार और विजय राणा ने पशुपालन विभाग के सहयोग से सिरमौर जिला के पिपलीवाला, शर्ली, जामना, कंडो चयोग, कंडो बटनोल, शिरी क्यारी, भवाई और अंधेरी गांव में शिविरों का आयोजन कर क्षेत्र की करीब 180 गायों की जांच की । ऐसे पशुओं के सैंपल लिए जा रहे हैं,hp news


जिससे पशु वैज्ञानिक यह भी जानेंगे कि किन हार्मोन्स और मिनरल्स की कमी से पहाड़ी क्षेत्रों के पशु जूझ रहे हैं ताकि पशुपालकों को उनके निदान बताकर समस्या के समाधान का प्रयास किया जा सके। वैज्ञानिकों ने खनिजों, जैव रासायनिक और हार्मोनल प्रोफाइल और गर्भाशय के संक्रमण के विस्तृत निदान के लिए जननांग निर्वहन के नमूनों का अध्ययन करने के लिए रक्त के नमूने एकत्र किए। पशुओं में परजीवी भार और बांझपन के साथ उनके संबंध का अध्ययन करने के लिए मल के नमूने भी एकत्र किए गए ।hp news

विभिन्न रोगों की विस्तृत जांच के लिए लगभग 1100 रक्त, 800 गर्भाशय डिस्चार्ज और 12 सौ फेकल नमूने एकत्र किए गए हैं। क्लीनिक-गायनोकोलॉजिकल परीक्षा के माध्यम से प्रजनन संबंधी बीमारियों की क्षेत्रवार मैपिंग, रक्त जांच के माध्यम से पोषण संबंधी कमियां, प्रजनन समस्याओं के लिए परजीवी संक्रमण और गर्भाशय के संक्रमण के लिए जिम्मेदार माइक्रो फ्लो किया जा रहा है। कृषि विवि के कुलपति प्रो अशेक कुमार सरयाल ने कहा कि वैटरिनरी कालेज की टीम द्वारा लगाए गए इस तरह के 261 शिविरों में सौ शिविर प्रदेश के दुगर्म इलाकों में लगाए गए हैंhp news

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