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शिक्षक ढो रहे पानी 15 दिन से बच्चों की प्यास बुझाने के लिए भी पानी नहीं

शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान दिया जाता है लेकिन एक बच्चे के जीवन में माता-पिता के बाद शिक्षक की कितनी अहमियत होती है इसके बारे में समान का असल मतलब अगर सीखना है तो इन दिनों जिला हमीरपुर के मिडिल स्कूल भयंकर चलिए साथिया संस्कार के होते हैं उससे भी परिचित हो जाएंगे 


और शिक्षकों को दिल से सलाम भी करेंगे क्षेत्र की विकास विभाग चंद्रा से नहीं उठा तो इन दिनों यहां शिक्षक  खुद ही कंधों पर घड़े रखकर बावड़ी से पानी भरकर स्कूल पहुंचा रहे हैं ऐसा इसलिए कि स्कूल में इन दिनों बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं लगी हुई है और मिड डे मील अलग से ऐसे में सरकारी व्यवस्था पर पंगु कार्यप्रणाली से लड़ने के बाद जब कुछ नहीं बना तो को ने खुद ही इस समस्या का समाधान करने की ठान ली 
शिक्षक ढो रहे पानी 15 दिन से  बच्चों की प्यास  बुझाने  के लिए भी पानी नहीं


पिछले 15 दिनों से स्कूल में पेयजल की सप्लाई बारिश है स्कूल प्रशासन ने कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार फोन पर शिकायत भी की लेकिन कोई हल नहीं निकला तो लिखित शिकायत भी दे दी फिर भी शिक्षकों की अर्जी नामंजूर हो गई और विभाग हरकत में नहीं आया 

स्कूल प्रबंधन और सब जगह शिकायत कर थक हार के खुद पानी भरने को मजबूर हो गया ताकि स्कूल में रोजमर्रा के काम ना रुके स्कूल में लगभग 50 बच्चों के लिए खाना बनता है जिस में पानी ना होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है 

आईपीएच अभियंता  ओपी भरद्वाज ने कहा समस्या उनके दयान में नहीं है फिर भी अगर ऐसा है तो गलत है सबंदित अदिकारियों से इसके बारे में पूरी जानकारी लेकर उन्हें तुरंत समस्या का हल करने के निर्देश दे दिए जायेगे पानी की समस्या का हल क्यों नहीं हुआ इसकी रिपोर्ट भी मांगी जाएगी 

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